गढ़वाल हिमालय की पहाड़ियों में जब मौसम बदलता है, तो पगडंडियों पर सन्नाटा छा जाता है। लेकिन इसी सन्नाटे के बीच, चमोली जिले के आखिरी गांव लोहाजंग में सुबह से ही हलचल शुरू हो जाती है। बैकपैक तैयार हो रहे होते हैं, सेफ्टी गियर्स की चेकिंग होती है और स्थानीय युवा ट्रेकर्स के दल को ब्रीफिंग दे रहे होते हैं। यह नज़ारा है GoAdven India के बेस कैंप का—एक ऐसी संस्था जो बीते कुछ सालों में उत्तराखंड में सुरक्षित और जिम्मेदार साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) का बड़ा चेहरा बनकर उभरी है।
देहरादून से लोहाजंग तक: ग्राउंड ज़ीरो पर मज़बूत पकड़
ज़्यादातर ट्रैवल एजेंसियां शहरों के वातानुकूलित दफ्तरों से काम चलाती हैं, लेकिन GoAdven India की कार्यशैली अलग है। देहरादून में अपने मुख्य कार्यालय के संचालन के साथ-साथ, संस्था का वास्तविक दिल चमोली के लोहाजंग में धड़कता है। यह वही ऐतिहासिक पड़ाव है जहाँ से प्रसिद्ध Roopkund Trek और Brahmatal Trek की शुरुआत होती है।
ग्राउंड ज़ीरो पर खुद का इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुभवी लोकल टीम होने के कारण, GoAdven India किसी भी आपात स्थिति में सबसे तेज़ रेस्पॉन्स देने में सक्षम है। यही वजह है कि देशभर से आने वाले नए और अनुभवी ट्रेकर्स के बीच इस संस्था का भरोसा तेज़ी से बढ़ा है।

“पहाड़ का विकास, पहाड़ के लोगों के साथ” — प्रदीप कुनियाल
पर्यटन को केवल व्यवसाय न मानकर इसे क्षेत्र के सामाजिक बदलाव से जोड़ना ही इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खासियत है। मीडिया से बातचीत के दौरान संस्था के विज़न पर प्रकाश डालते हुए संस्थापक ने अपनी प्राथमिकता स्पष्ट की।

“हमारा लक्ष्य केवल ट्रेकर्स को चोटी तक पहुँचाना नहीं है। असली चुनौती यह है कि उस यात्रा से स्थानीय ग्रामीण की ज़िंदगी में क्या बदलाव आया। जब तक पर्यटन का पैसा गाँव के आखिरी घर तक नहीं पहुँचेगा, तब तक इको-टूरिज्म का कोई मतलब नहीं है।”
— प्रदीप कुनियाल (Pradeep Kuniyal), संस्थापक एवं सीईओ – GoAdven India

पलायन पर ब्रेक: स्थानीय युवाओं और होमस्टे को सहारा
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों की सबसे बड़ी समस्या पलायन रही है। लेकिन GoAdven India ने इस दिशा में धरातल पर काम किया है। लोहाजंग, वाण, घेस और दिदना जैसे सुदूर गाँवों के दर्जनों युवाओं को सर्टिफाइड ट्रेक गाइड, कुक और लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट के रूप में तैयार किया गया है।
पोर्टर्स और खच्चर मालिकों को पारदर्शी व सही मानदेय देने के साथ-साथ, संस्था पर्यटकों को स्थानीय घरों (Homestays) में ठहराने को प्राथमिकता देती है। इससे ग्रामीणों को सीधे अपने घर पर ही सम्मानजनक आजीविका मिल रही है। इसके अलावा, ट्रेकर्स को पारंपरिक गढ़वाली भोजन और लोक संस्कृति से रूबरू कराकर स्थानीय धरोहर को भी सहेजा जा रहा है।

रोमांच प्रेमियों के लिए खास: हर मौसम के चुनिंदा ट्रेक्स
चाहे सर्दियों की सफेद चादर में ढकी चोटियां हों या मानसून के बाद खिलने वाली मखमली घास, GoAdven India हर सीजन के लिए बेहतरीन और सुरक्षित ट्रेकिंग रूट्स संचालित करता है:

- Kedarkantha Trek: 5 दिनों का यह शीतकालीन ट्रेक 12,500 फीट की ऊंचाई से हिमालय की मुख्य चोटियों का विहंगम 360° नज़ारा पेश करता है।
- Brahmatal Trek: 5 दिनों का यह ट्रेक जमे हुए ताल और माउंट त्रिशूल व नंदा घुंटी के नज़दीकी दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है।
- Roopkund Trek: 8 दिनों का यह चुनौतीपूर्ण अभियान अपनी रहस्यमयी कंकाल झील और विशाल बुग्यालों के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है।
- Valley of Flowers Trek: यूनेस्को की विश्व धरोहर, जो मानसून में सैकड़ों दुर्लभ फूलों की सुगंध से महक उठती है।
- Dayara Bugyal Trek: 4 दिनों का यह आसान ट्रेक परिवार और नए ट्रेकर्स के लिए विशाल घास के मैदानों का अनुभव लेने का सबसे अच्छा जरिया है।
- Bagji Bugyal Trek: 5 दिनों का यह ऑफबीट ट्रेक भीड़भाड़ से दूर एकांत और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव कराता है।
- Monal Top Trek: 5 दिनों का यह सुंदर ट्रेक गढ़वाल के अनछुए हिस्सों की सैर कराता है।
बुकिंग जानकारी
यदि आप भी इस सीज़न हिमालयी पगडंडियों पर कदम रखने का मन बना रहे हैं और एक सुरक्षित व प्रामाणिक पहाड़ी अनुभव की तलाश में हैं, तो GoAdven India एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।
- ऑफिशियल वेबसाइट: www.goadvenindia.com
- विंटर ट्रेक्स पैकेज: GoAdven India Winter Treks
- हेड ऑफिस (Dehradun): Lane No. 4, Vivekanand Gram, Jogiwala, Dehradun
- ब्रांच ऑफिस (Lohajung): Roopkund Road, Lohajung, Chamoli, Uttarakhand (246427)
- फोन / व्हाट्सएप: +91-70602 58733
- ईमेल: info@goadvenindia.com




